अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

 

हाइटल हर्निया एक बेहद आम बीमारी है. हर्निया, पेट की माँसपेशियों में किसी एक जगह पर आई कमज़ोरी या गड़बड़ी है. इससे पेट की अंदरूनी सतह, पेट के कमज़ोर हिस्से की तरफ़ चली जाती है और छोटी गुब्बारे जैसी रचना बनाती है. इसे त्वचा के नीचे किसी उभार की तरह महसूस किया जा सकता है. पेट की मांसपेशियों में आई इस कमज़ोरी या दरार से आँत जैसे फ़ैट वाले अंग या ऊतक कमज़ोर हिस्से में चले जाते हैं.

 

हाइटल हर्निया में पेट का ऊपरी हिस्सा फ़ूलकर डायफ़्राम के बीच के गैप में, सीने में जमा होने लगता है. डायफ़्राम आपके पेट और सीने को अलग करने वाली पतली सी मांसपेशी है. डायफ़्राम एसिड को आपकी ग्रासनली में आने से रोकता है.

 

Hiatal Hiatus Hernia

 

एसिड रिफ़्लक्स एक आम बीमारी है, जिसमें जलन के साथ दर्द होता है. इसमें सीने के निचले हिस्से में जलन के तौर पर भी जानते हैं. ऐसा तब होता है, जब पेट का एसिड भोजन की नली में वापस चला आता है.

 

हफ़्ते में दो बार से ज़्यादा एसिड रिफ़्लक्स की शिकायत होने पर, गैस्ट्रोएसोफ़ैगल रिफ़्लक्स डिज़ीज़ (GERD) की पहचान होती है.

 

गैस्ट्रोएसोफ़ैगल स्फिंक्टर, मांसपेशी का छल्ला होता है. यह एक वॉल्व की तरह काम करता है, जिससे खाना पेट में तो जाता है, लेकिन वापस एसोफ़ैगस में नहीं आता है. जब यह वॉल्व ठीक से काम नहीं करता और पेट की चीज़ें ग्रासनली में वापस आती हैं, तो सीने में जलन जैसे, एसिड रिफ़्लक्स के लक्षण महसूस होते हैं.

 

Gastroesophageal, acid reflux disease

 

सीने में जलन तब होती है जब निचले एसोफ़ैगल स्फिंक्टर (एलईएस) के सामान्य स्थितियों जितना मज़बूत न रहता है. यह पेट के एसिड को वापस ग्रासनली में आने देता है और तकलीफ़ होती है.

 

हाइटल हर्निया की पहचान तब होती है, जब पेट डायफ़्राम के बीच के गैप में, सीने में चला जाता है. डायफ़्राम एसिड के लिए एक अतिरिक्त रुकावट है.

 

हाइटल हर्निया का इलाज तब तक ज़रूरी नहीं है, जब तक इससे घुटन न होने लगे या जीईआरडी की जटिलताएँ न पैदा हों.

 

Heartburn treatment

इसकी सबसे आम प्रक्रिया को फ़ंडोप्लिकेशन कहते हैं. इस सर्जरी में, आपका सर्जन:

 

  1. हाइटल हर्निया को ठीक करेगा. इसमें, आपके डायफ़्राम के गैप को टाँके लगाकर कसना शामिल है, ताकि आपके पेट को मांसपेशियों की दीवार के इस अंतर के ज़रिए ऊपर आने से रोका जा सके.  इस बात का सुझाव दिया जाता है कि सर्जन ठीक किए गए हिस्से में मेश का एक टुकड़ा लगाकर उसे और सुरक्षित कर दें.
  2. आपके पेट के ऊपरी हिस्से को ग्रासनली के आस-पास टाँके लगाकर लपेट दें. ये टाँके आपकी ग्रासनली के आखिरी हिस्से पर दबाव डालते हैं. यह पेट के एसिड और भोजन को वापस ग्रास नली में आने से रोकता है.

 

 

सर्जरी सामान्य एनेस्थीसिया देकर की जाती है. इसलिए आप नींद में रहत हैं और दर्द का अहसास नहीं होता. सर्जरी में अक्सर 2 से 3 घंटे लगते हैं. आपके सर्जन कई अलग-अलग तकनीकों में से कोई चुन सकते हैं.

 

हाइटल हर्निया में क्रूरोप्लास्टी के लिए बायोएब्ज़ॉर्बेबल मेश का इस्तेमाल अहम है, क्योंकि:

  • बाद में होने वाली जटिलताओं पक्का बचाव होता है 
  • 5 साल के लिए, दोबारा होने या दोबारा सर्ज़री की दर कम होती है.

 

 

Gore Bio-A® टिश्यू रीइन्फ़ोर्समेंट एक 3डी बायोएब्ज़ॉर्बेबल मेश है:

  • इसमें दोबारा होने की दर 0-17% है
  • 6-7 महीने में घुल जाता है और शरीर में कोई मेश मैटेरियल बाकी नहीं रहता
  • इसे > 4 < 8 सेमी² तक की गड़बड़ियों में इस्तेमाल किया जा सकता है

 

Gore Bio – A® खास तौर पर डिज़ाइन की गई बायोकंपैटिबल सिंथेटिक पॉलिमर का जाल है, जो शरीर में धीरे-धीरे घुल जाता है. यह आपस में बहुत अच्छे से जुड़े खुले छेदों का 3डी मेट्रिक है. इससे कोशिकाओं को ठीक होने ऊतकों को बनने में मदद मिलती है और कोई भी स्थायी मैटेरियल शरीर में नहीं रहता है. Gore Bio – A® को खास एनवायरमेंट में सिंथेटिक तरीके से बनाया जाता है. इस उत्पाद में मानव या जानवरों से लिए गए ऊतकों का इस्तेमाल नहीं होता है. इसलिए कोशिका, बी

बदहज़मी या डायस्पेप्सिया एक आम शब्द है, जो आपके पेट के ऊपरी हिस्से में परेशानी के बारे में बताता है. 

 

 

indigestion symptoms causes treatment

 

बदहज़मी बीमारी नहीं है. हर व्यक्ति को किसी अलग वजह से बदहज़मी हो सकती है. बदहज़मी के लक्षणों में पेट दर्द, खाना शुरू करने के थोड़ी देर बाद ही पेट भरा हुआ महसूस करना, पेट के ऊपरी हिस्से में जलन और/या पेट फूलना और जी मिचलाना शामिल हैं. बदहज़मी, पाचन से जुड़ी किसी दूसरी बीमारी की चेतावनी हो सकती है. 

 

बदहज़मी के शिकार लोगों को सीने में जलन की शिकायत भी हो सकती है. हालांकि, सीने में जलन और बदहज़मी दो अलग-अलग वजह से होते हैं. बदहज़मी तब होती है, जब खाने को आपके पेट तक लाने वाले ऐसोफ़ेगस में पेट का एसिड वापस आता है. इसमें आपके सीने के बीच वाले हिस्से में जलन या दर्द होता है.

 

डॉक्टर को कब दिखाएँ?

 

थोड़ी बहुत बदहज़मी से घबराने की ज़रूरत नहीं है. अगर दो हफ़्तों से ज़्यादा समय तक परेशानी बनी रहे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. जब आपको बहुत ज़्यादा दर्द हो. साथ ही, कुछ और लक्षण जैसे, वज़न कम होना, बार-बार उल्टी होना, निगलने में तकलीफ़, पसीना निकलना, साँस फूलना, थकान महसूस हों, तो तुरंत इलाज की ज़रूरत हो सकती है.

 

बदहज़मी के कारण

 

बदहज़मी के कई कारण हो सकते हैं. अक्सर, बदहज़मी जीवनशैली की वजह से होती है और खाने-पीने या दवा की वजह से हो सकती है. बदहज़मी के आम कारणों में, बहुत ज़्यादा या जल्दी-जल्दी खाना, मसालेदार खाना, बहुत ज़्यादा कैफ़ीन या कोल्ड्रिंक पीना, धूम्रपान और कुछ खास एंटीबायटिक लेना शामिल हैं.

 

कभी-कभी बदहज़मी पाचन से जुड़ी दूसरी बीमारियों से भी होती है. जैसे, पेट में सूजन, सेलिऐक डिज़ीज़, गॉलब्लैडर की पथरी, और पैंक्रियाज़ की सूजन. हो सकता है कि ये एसिड रिफ़्लक्स, जीईआरडी, सीने में जलन, हाइटल हर्निया और दूसरी कई बीमारियाँ होने का लक्षण हो.

 

आमतौर पर, बदहज़मी से जटिल समस्याएँ नहीं होती है. यह आपकी जीवनशैली पर असर डाल सकती है. इसकी वजह से आप बेहद भूखे होने पर भी कम खाते हैं. हो सकता है कि आप इन लक्षणों के चलते अपनी रोज़ की दिनचर्या को न अपना पाएँ.

 

 

Uncommon Causes for Indigestion

पहचान

 

अगर आपको बदहज़मी के हल्के लक्षण हैं, लेकिन वज़न कम होने और अक्सर उल्टी होने जैसे गंभीर लक्षण नहीं हैं, तो सेहतमंद इतिहास और शारीरिक जाँच ही काफ़ी होंगी.

 

अगर आप अचनाक से बदहज़मी के गंभीर लक्षण महसूस करें या आपकी उम्र 55 से ज़्यादा हो और आपको कुछ एक लक्षण महसूस हों, तो आपकी हेल्थकेयर सेवा आपको कुछ टेस्ट का सुझाव दे सकती है. इनमें कुछ लैब जाँचें, साँस और मल की जाँच, एंडोस्कोपी या एक्स-रे या सीटी स्कैन जैसी इमेजिंग जाँचें शामिल हैं.

 

दुबई में बदहज़मी का इलाज:

 

हम पहले ही बता चुके हैं कि बदहज़मी कई वजहों से होती है. इसलिए डॉक्टर आपकी वजह को ध्यान में रखते हुए सही इलाज चुनेगा. कई बार बदहज़मी जीवनशैली में बदलाव और दवाओं से सही हो जाती है.

 

कभी-कभी बदहज़मी के लक्षण हाइटल हर्निया होने की चेतावनी हो सकते हैं. ऐसा होने पर आपकी हेल्थकेयर सेवा आपको बता सकती है कि सर्जरी ही एकमात्र उपाय है.

 

दुनिया के सबसे अच्छे हेल्थकेयर सिस्टम में से एक दुबई में है. यहां उच्च मानकों की मेडिकल केयर सेवाएं मौजूद हैं. दुबई में डॉ अली अल दामेह जैसे विश्वस्तरीय डॉक्टर मौजूद हैं. बदहज़मी के इलाज के दुबई में काफ़ी कारगर नतीजे मिले हैं. इससे ऐसे कई मरीज़ों का जीवन बेहतर हुआ है, जो गंभीर लक्षणों का शिकार थे और इससे उनकी दिनचर्या और रोज़ की गतिविधियों पर असर पड़ रहा था. साथ ही, सीने में जलन के इलाज में, दुबई में उन लोगों की स्थिति में काफ़ी सुधार हुआ है, जो गंभीर लक्षणों का शिकार थे. हाल ही में, एसिड रिफ़्लक्स के इलाज में दुबई में मरीज़ों की स्थिति में काफ़ी सुधार देखा गया है.

 

अगर मरीज़ हाइटल हर्निया की वजह से सीने में जलन का शिकार है, तो डॉक्टर उसकी स्थिति को समझते हैं. अगर खून बहना, घाव होना, अल्सर, ग्रासनली सिकुड़ जाना या कोई और खतरनाक लक्षण पहचान में आता है, तो सर्जरी ही एक मात्र उपाय है. कई मरीज़ शुक्रिया जताते हैं कि दुबई में हाइटल हर्निया के इलाज के बाद उनकी ज़िंदगी बेहतर हुई है. खासतौर पर, जब ये सर्जरी डॉ अली अल दामेह जैसे अनुभवी सर्जन ने की हों.

 

 

डॉ अली अल दामेह बीमारियों से जुड़ी सर्जरी के जानकार हैं. साथ ही यह लैप्रोस्कोपिक और ओपन हर्निया के इलाज के भी विशेषज्ञ हैं. उनकी सबसे बड़ी विशेषताओं में, जीईआरडी, हाइटल हर्निया का इलाज शामिल है.

 

डॉ अली अल दामेह ने अपने करियर के दौरान:

  • 7000 अपर जीआई की हैं, जिनमें जटिल और कैंसर के मामले भी शामिल हैं
  • 800 हाइटल हर्निया के मामले और निस्सेन फ़ंडोप्लिकेशन भी ठीक किए हैं

प्रोटॉन पंप इनहिबिटर, दवाओं की एक श्रेणी है जिनका इस्तेमाल एसिड रिफ़्लक्स के इलाज में होता है. एक ऑनलाइन प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक इनके लंबे समय तक इस्तेमाल से पेट का कैंसर होने की संभावन बढ़ जाती है.

 

आँतों से हेलीकोबैक्टर पायलोरी (बैक्टीरिया) को खत्म करने से व्यक्ति में पेट का कैंसर होने की संभावना कम हो जाती है. जिन लोगों का इलाज सफ़ल रहा है, उनमें से कुछ लोगों को बीमारी होने की संभावना रहती है. यह कैंसर से मृत्यु के मामलों में दुनिया में तीसरे स्थान पर है.

 

लंबे समय तक जीईआरडी की दवाएँ लेने से:

  • ग्रासनली का कैंसर हो सकता है. बिना पर्चे के मिलने वाले एंटासिड लेते रहने से एसोफ़ैजिअल एडेनोकारसिनोमा हो (एक तरह का कैंसर) हो सकता है.
  • हड्डियाँ कमज़ोर हो सकती हैं. प्रोटॉन पंप इनहिबिटर या पीपीआई जीईआरडी के लिए सबसे आधुनिक दवाएँ हैं. ये इतनी कारगर हैं कि ये जीईआरडी के लगभग हर मरीज़ को ठीक कर सकती हैं और उनकी ग्रासनली से सारे लक्षण मिटा सकती हैं. हालाँकि, कुछ बेहद विवादास्पद मामलों में लंबे समय तक पीपीआई के इस्तेमाल से हड्डियाँ कमज़ोर हो सकती हैं. हड्डियाँ कमज़ोर होने से उनके टूटने का खतरा बढ़ जाता है.

 

हाइटल हर्निया को ठीक करने का सुझाव दिया जाता है जब मरीज़ को:

 

  • बहुत ज़्यादा सीने में जलन हो
  • गैस्ट्रिक एसिड के वापस आने (रिफ़्लक्स) की वजह से ग्रासनली में काफ़ी सूजन हो
  • डायफ़्राम (एसोफ़ैगल स्ट्रिक्चर) के ज़रिए गैप (हाइटस) सिकुड़ रहा हो
  • साँस में लगातार गैस्ट्रिक एसिड के जाने से फेफ़ड़ों में गंभीर सूजन (निमोनिया) हो

 

 
 
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